अमरप्रीत सिंह/सोलन 
गांव का पैसा गांव में और शहर का पैसा गांव में, इस नारे को सफल बनाने के लिए कृषि विभाग हिमाचल प्रदेश द्वारा विकासखंड सोलन में शून्य लागत प्राकृतिक खेती पर खंड स्तरीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में सोलन वह आस-पास के करीब 150 प्रगतिशील किसानों ने भाग लिया। कार्यशाला में विशेष रूप से नौणी विश्वविद्यालय से आए विशेषज्ञों द्वारा किसानों को शून्य लागत पर प्राकृतिक खेती करने के बारे जागरुक किया गया। विशेषज्ञों द्वारा किसानों को जीवामृत, घन जीवामृत, बीजामृत बनाने बारे विस्तार से जानकारी उपलब्ध करवाई गई। वही विशेषज्ञ द्वारा देसी गाय के गोबर का प्रयोग करके बीजामृत तैयार करने की विधि बताई गई।
     कृषि विभाग के विषयवाद विशेषज्ञ डॉक्टर डीपी गौतम ने जानकारी देते हुए बताया कि आज कार्यशाला में किसानों को जीरो बजट खेती व उसके घटकों के बारे में विस्तार से बताया गया है। उन्होंने बताया कि आज हम खेतों में जहरीले कीटनाशक का इस्तेमाल करते हैं। जिन्हें खाकर सभी लोग विभिन्न प्रकार की बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। हम प्राकृतिक खेती करके लोगों को बीमारियों से बचा सकते हैं। जिससे आम लोगो को प्राकृतिक खेती के उत्पादों से लाभ मिलेगा।
     वही कार्यशाला में भाग लेने आए किसानों ने कहा कि आज से पहले वह कीटनाशकों का प्रयोग खेतों में करते थे। आज के बाद में जैविक खेती ही करेंगे और जैविक खेती को ही बढ़ावा देंगे। उन्होंने कहा जिस तरह आज लोग खेतों में अंधाधुंध कीटनाशकों का प्रयोग कर रहे हैं, उससे हमारे शरीर व हमारी आने वाली पीढ़ियों को नुकसान झेलना पड़ सकता है। इसलिए सभी लोगों को जैविक खेती की तरफ बढ़ना चाहिए। प्राकृतिक उर्वरकों का प्रयोग करना चाहिए। जिससे न केवल हम अपने स्वास्थ्य में सुधार ला सकते बल्कि जमीन की उत्पादन क्षमता को भी बढ़ावा मिलेगा।

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