एमबीएम न्यूज़ / शिमला
नियामकों को दवाईयों की गुणवत्ता एवं क्षमता की दृष्टि से समाशोधन करते समय बहुत सावधान रहना चाहिए। अच्छी तरह से सुसज्जित परीक्षण प्रयोगशाला की स्थापना कर गुणवत्ता मानकों पर पूर्ण नियंत्रण रखने के लिए विनियामक ढांचा मजबूत होना चाहिए। यह बात मुख्यमंत्री जय राम ठाकुर ने आज यहां हिमाचल प्रदेश के दवा निर्माताओं और कॉस्मेटिक उद्योग के साथ परिसंवाद के दौरान कही। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने नशीली दवाओं के रूप में दुरूपयोग की जा रही दवाओं के खतरे पर अंकुश के लिए प्रशासनिक, विधायिका तथा नियामक स्तर पर कदम उठाए हैं। मानव जीवन का मूल्य किसी ओर चीज से अधिक महत्वपूर्ण है।
इस प्रकार गुणवत्ता और क्षमता से समझौता करने वालों को भागने की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए। राज्य में फार्मा तथा कॉस्मेटिक सेक्टर न केवल राज्य के युवाओं को पर्याप्त रोजगार के अवसर प्रदान करने बल्कि क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि उद्यमियों को सुविधा प्रदान करने के लिए बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ में सड़कों, स्वास्थ्य, शिक्षा तथा जलापूर्ति इत्यादि जैसी बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाएगा। सरकार फार्मा उद्योग के प्रतिनिधियों द्वारा उन्हें बेहतर सुविधाएं प्रदान करने के सम्बन्ध में उठाए गए मुद्दों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करेगी।
जयराम ठाकुर ने कहा कि उद्यमियों को सुविधा प्रदान करने के लिए औद्योगिक उद्देश्य के लिए भूमि उपयोग परिवर्तन के मुददे पर सहानुभूतिपूर्वक विचार किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सरकार उद्योगपतियों को यथासम्भव सहयोग प्रदान करेगी ताकि वे राज्य में अपनी इकाईयां स्थापित कर सकें। उद्योगपतियों को देश के विभिन्न भागों में सुचारू रूप से अपने उत्पादों के परिवहन के लिए सर्वोत्तम परिवहन सुविधाएं प्रदान करने के प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने कहा कि फार्मा उद्योग के प्रतिनिधियों के साथ इस प्रकार की और अधिक संवाद बैठकें की जाएगी। ताकि बेहतर समझ और तालमेल विकसित किया जा सके। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को विभिन्न औद्योगिक घरानों ने मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए 1.44 करोड़ रुपये का चेक भेंट किया।
मुख्यमंत्री ने उद्योगपतियों का इस पुनीत कार्य के लिए अंशदान करने पर आभार व्यक्त किया और कहा कि यह राशि गरीब व जरूरतमंद लोगों को दुःख व बीमारी के समय सहायता प्रदान करने में सहायक सिद्ध होगी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री विपिन सिंह परमार ने कहा कि वर्ष 2003 में राज्य के लिए विशेष औद्योगिक पैकेज की घोषणा के कारण प्रदेश में औषधीय उद्योग लगातार उन्नति की ओर अग्रसर हैं। उन्होंने कहा कि उपयोग में लाई जाने वाली हर तीसरी औषधी प्रदेश के बद्दी-बरोटीवाला-नालागढ़ क्षेत्र में तैयार की जाती है। उन्होंने कहा कि दवाइयों का निर्माण वहन करने योग्य और गरीबों की पहुंच में होना चाहिए। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य देखभाल सुविधाएं उपलब्ध करवाने के प्रति वचनबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के फार्मा उद्योगों को हर संभव सहायता सुनिश्चित बनाएगी।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार घटिया दवाइयों के उत्पादन में संलिप्त दवा निर्माताओं के विरूद्ध सख्त कार्रवाही अमल में लाएगी। अतिरिक्त मुख्य सचिव स्वास्थ्य बी.के. अग्रवाल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश देश का सबसे बड़ा फार्मा हब के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के औषधीय उद्योगों द्वारा सालाना 40 हजार करोड़ रुपये की दवाइयों का उत्पादन किया जाता है, जिसमें से 10 हजार करोड़ रुपये की दवाइयों का निर्यात किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि औषधीय व्यसनों पर प्रभावी नज़र रखने के लिए विशेष बल दिया जा रहा है।
दवाईयों का नशे के रूप में दुरूपयोग पर नज़र रखने के लिए 186 निरीक्षण किए गए। उन्होंने कहा कि सोलन ज़िला के बद्दी में शीघ्र ही जांच प्रयोगशाला स्थापित की जाएगी। निदेशक स्वास्थ्य सुरक्षा एवं विनियमन डॉ. नरेश कुमार लट्ठ ने मुख्यमंत्री तथा अन्य गणमान्य व्यक्तियों का स्वागत किया। मुख्यमंत्री के प्रधान निजी सचिव विनय सिंह, मुख्य दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह, निदेशक सूचना एवं जन सम्पर्क अनुपम कश्यप, फार्मा उद्योग के प्रतिनिधि व अन्य गणमान्य व्यक्ति इस अवसर पर उपस्थित थे।

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