एमबीएम न्यूज़ / हमीरपुर
गर्मियों के बाद बरसात के मौसम ने दस्तक दे दी है। वहीं उपमंडल भोरंज के लोगों को अभी से चैंथ खड्ड के उफान का डर सताने लगा है। गौरतलब है कि चैंथ खड्ड 12 किलोमीटर तक फैली हुई है। इसके किनारे पर गांव और सरकारी भवन स्थापित हैं। बरसात के मौसम में गांव और भवनों पर खतरा मंडराने लगता है। बीते वर्षों में खड्ड में आई बाढ़ अपना रौद्र रूप भी दिखा चुकी है।

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     पिछले कुछ वर्षों में हुई तबाही से लोग इतने सहम चुके हैं कि वह नए आशियानों की खोज में हैं, लेकिन खड्ड के किनारे बसे लोगों का मानना है कि वे जीवन भर की पूंजी लगाने से बनाए आशियानों को खोना भी नहीं चाहते हैं। भोरंज उपमंडल की चैथ खड्ड ने दो वर्ष लगातार 2014 व 2015 में उपमंडल में भारी तबाही मचाई थी। इससे करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था और दो पुलों नगरोटा गाजियां, खड्ड बाजारद्ध और धमरोल पहलीद्ध पुल पर भी खतरा मंडराया था।
      इसके साथ सैकड़ों कनाल भूमि इसमें बह गई थी और खड्ड बाजार नगरोटा में दुकानों व घरों में पानी भर गया था।  जिससे करोड़ों रुपए का नुकसान हुआ था। लेकिन चार-पांच वर्ष बीतने पर भी इसके तटीकरण के लिए कोई काम शुरू नहीं हुआ है। लोगों में तबाही का इतना खौफ है कि गत वर्ष भी बरसात के दिनों में लोगों को दूसरे गांवों में रातें बिताने को मजबूर होना पड़ा था।
      लोगों का कहना है कि पिछली बरसात में विभाग ने बुलडोजर से पत्थर व बजरी किनारे कर व कुछ डंगे बेशक लगा दिए हैं। लेकिन यह सब नाकाफी है। जो थोड़ा सा पानी बढऩे पर ही फिर से बह जाएंगे। क्षेत्र की जनता का कहना है कि अब फिर से बरसात आने वाली है। यदि इस बार भी खड्ड का तटीकरण नहीं हुआ तो चैंथ खड्ड पर बने नगरोटा गाजियां, खड्ड बाजार, पुल और धमरोल पुल भी खतरे की जद में हैं। इसके बावजूद तटीकरण में देरी की जा रही है।
चैंथ खड्ड से इनकों डर
चैंथ खड्ड की जद में कई गांव और सरकारी भवन जिनमें चंबोह स्कूलए बधानी स्कूल व बाजार, नगरोटा खड्ड बाजार व स्कूल, नगरोटा पुल, धमरोल पुल व बाजार इत्यादि आते हैं।
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