धर्मशाला, 17 सितम्बर: जिला बाल संरक्षण कमेटी की बैठक शुक्रवार को यहां अतिरिक्त उपायुक्त, राहुल कुमार की अध्यक्षता में सम्पन्न हुई। बैठक के दौरान अतिरिक्त उपायुक्त ने जिला में कार्य कर रहे बाल संरक्षण संस्थानों एवं विभिन्न विभागों एवं गैर सरकारी संस्थाओं से बच्चों की सुरक्षा एवं उन्हें उपलब्ध करवाई जा रही अन्य सुविधाओं के बारे में जानकारी ली।

राहुल कुमार ने बताया कि जिला में 6 विभिन्न बाल संरक्षण संस्थान 18 वर्ष से कम आयु के अनाथ एवं असहाय बच्चों को संरक्षण प्रदान कर रहे हैं। इन संस्थानों के माध्यम से इन बच्चों को समाज की मुख्यधारा में सम्मिलित करने के लिए हर संभव प्रयास सरकार एवं अन्य संस्थाओं के सहयोग से किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में इन 6 विभिन्न संस्थानों में लगभग 121 बच्चे अपना जीवन यापन कर रहे हैं। बच्चों को समय-समय पर स्वास्थ्य सुविधाएं, उनके बौद्धिक विकास से सम्बन्धित विभिन्न प्रकार की काउंसलिंग, उचित खान-पान एवं साफ-सफाई इत्यादि संस्थानों में सुनिश्चित की जा रही है।

अतिरिक्त उपायुक्त ने कहा कि कोविड काल के दौरान जिला में लगभग 576 बच्चे प्रभावित हुए हैं, जिनमें से 29 बच्चे पूरी तरह से अनाथ हो गए हैं जबकि 201 बच्चों में इस अवधि में अपने माता या पिता में से किसी एक को खो दिया है। इन सब में 7 बच्चे ऐसे हैं, जिनके माता-पिता की मृत्यु कोविड के कारण हुई है। प्रशासन प्रयासरत है कि इन बच्चों को संरक्षण प्रदान किया जाए, ताकि यह अपना जीवनयापन बेहतर ढंग से कर पाएं।

उन्होंने कहा कि सरकार विभिन्न योजनाएं चला कर इन बच्चों एवं इनकी जिम्मेवारी लेने वाले उनके आश्रितों को आर्थिक सहायता प्रदान कर रही है। जिला में मदर टेरेसा योजना के तहत भी ऐसे परिवार के दो बच्चों को 6-6 हजार रुपए वार्षिक प्रदान किए जा रहे हैं जबकि मिशन वात्सल्य योजना के तहत 2500 रुपए मासिक आर्थिक सहायता के रूप में प्रदान किए जा रहे हैं। उन्होंने जिला में बच्चों को भीख मांगने के लिए मजबूर करने वाले लोगों एवं उन्हें बाल श्रम करवाने वालों के विरूद्ध कड़ी कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए।

उन्होंने कहा कि ऐसे असहाय बच्चे, जो अभी तक स्कूल तक नहीं पहुंच पाए हैं, उन्हें शिक्षा विभाग स्कूलों तक लाने का प्रयास करे।  
बैठक में उप पुलिस अधीक्षक बलदेव दत्त, जिला बाल संरक्षण अधिकारी राजेश कुमार, जिला परियोजना अधिकारी महिला एवं बाल विकास, विभिन्न विभागों के अधिकारी और गैर सरकारी संस्थाओं के प्रतिनिधियों सहित बाल संरक्षण संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

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