जीता सिंह नेगी/रिकांगपिओ 

हिमाचल प्रदेश को आवारा पशुओं से मुक्त करने के लिए समय-समय पर प्रदेश सरकार की ओर से कई घोषणाएं की जाती रही है। लेकिन सरकार की घोषणाएं धरी की धरी रह जाती है। किन्नौर के मुख्य जनपदों में इन बेसहारा पशुओं को अब तक कोई सहारा नहीं मिल पाया है। ऐसे में एक वर्ष पूर्व हिमाचल प्रदेश में भाजपा की जयराम सरकार के सत्तासीन होते ही अपने पहले बजट में गो सदन बनाने की घोषणा की थी। गौ सदन के लिए एक रूपए प्रति बोतल शराब पर सरकार ने टैक्स भी वसूल किया।

हैरानी की बात है कि जिस गौ माता के नाम पर सरकार ने धन कमाया, उसमे से एक साल बाद भी गौ माता पर खर्च नही की किया। किन्नौर मुख्यालय रिकांगपिओं व आस-पास के क्षेत्रों और राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 आज पूरी तरह से आवारा पशुओं का अड्डा बना हुआ है। ऐसे में सवाल उठता है कि प्रदेश सरकार गौ माता को आशियाना कब तक बना कर देगी।
किन्नौर जिला मुख्यालय रिकांगपिओं, भावानगर, स्पीलों, सांगला बाजार और राष्ट्रीय उच्च मार्ग-5 पर जगह- जगह आवारा पशुओं को देखे है।
क्या कहते है एसडीएम कल्पा 

मेजर अवनिन्द्र कुमार शर्मा एसडीएम कल्पा ने कहा कि आवारा पशुओ की समस्या रिकांगपिओं, सांगला में बढ़ रही है। इससे निजात पाने के लिए गोशाला निर्माण के लिए बीडीओ कल्पा को जिम्मेदारी सौंपी है। इसके अतिरिक्त सांगला में भी जमीन चयनित की गई है। जल्द ही दोनों स्थानों पर गौशाला का निर्माण किया जाएगा। उसके बाद यह समस्या नहीं आएगी। फ़ोटो। जिला के अलग अलग स्थानों में आवारा पशुओं का अड्डा।  

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