एमबीएम न्यूज़/शिमला

दिव्यांगजन समाज का अभिन्न हिस्सा हैं और इनमें विशेष क्षमताएं मौजूद हैं, जिनका समाज के विभिन्न क्षेत्रों में सदुपयोग कर इन्हें मुख्यधारा में शामिल किया जाना चाहिए। तकनीकी शिक्षा, श्रम व रोजगार तथा उद्योग मंत्री बिक्रम सिंह आज शिमला में हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम द्वारा दिव्यांगजनों के लिए आयोजित कार्यशाला ‘नवधारणा’ की अध्यक्षता करते हुए बोल रहे थे।
बिक्रम सिंह ने कहा कि हिमाचल प्रदेश कौशल विकास निगम भारत सरकार के सहयोग से एशियन बैंक के माध्यम से हिमाचल प्रदेश कौशल विकास परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है। परियोजना के तहत इस वर्ष 2000 दिव्यांग व्यक्तियों को विभिन्न पाठयक्रमों में प्रशिक्षण प्रदान करने तथा इन व्यक्तियों की क्षमता के अनुसार उन्हें रोजगार की व्यवस्था करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश में दिव्यांगजनों की संख्या 1.55 लाख हैं और इनमें से 90,000 को विकलांगता प्रमाण पत्र जारी किए जा चुके है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार दिव्यांगजनों को मुख्यधारा में शामिल करने के लिए कृत संकल्प है और उनको बेहतर जीवन प्रदान करने के लिए विशेष प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में विशेष आईटीआई के अलावा विभिन्न औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में दिव्यांगजनों को विभिन्न व्यवसायों में प्र्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। वर्तमान में औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में 200 दिव्यांगजनों को प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

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बिक्रम सिंह ने कहा बेशक इस वर्ग की संख्या के अनुरूप उन्हें रोजगारोन्मुखी प्रशिक्षण प्रदान करना एक बड़ी चुनौती है, लेकिन आने वाले वर्षों में चरणबद्ध ढंग से लक्ष्य में वृद्धि करके अधिकांश व्यक्तियों को उनकी क्षमता के अनुसार प्रशिक्षण व रोजगार की व्यवस्था करने के प्रयास किए जाएंगे। यह पुण्य का कार्य भी है। उन्होंने कहा कि लगभग 25000 दिव्यांगजन विभिन्न प्रकार के रोजगार प्राप्त करने के लिए पात्र हैं।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने दिव्यांगजनों की चिन्ता की और सम्मानजनक जीवन प्रदान करने के उद्देश्य से दिव्यांगजनों के लिए अधिनियम, 2016 पारित किया, जो इन व्यक्तियों को अनेक अधिकार प्रदान करता है। अधिनियम में समान अवसर, व्यवसायिक प्रशिक्षण प्रदान कर उन्हें रोज़गार परक बनाना तथा नौकरियों में समुचित आरक्षण की व्यवस्था प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि प्रधामंत्री की इस सोच को जमीनी स्तर तक पहुंचाने के लिए सम्बन्धित विभागों को स्वयंसेवी संस्थाओं तथा पंचायती राज संस्थानों का सहयोग लेकर इमानदार प्रयास करने होंगे।
तकनीकी शिक्षा मंत्री ने कहा कि दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने वाले विभागों विशेषकर शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता व उद्योग विभागों की कन्वर्जन्स अथवा संमिलन अति-आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हम सब मिलकर दिव्यांगजनों को सम्मानजनक जीवन जीने के लिए बदलाव ला सकते हैं। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग द्वारा दिव्यांग व्यक्तियों की पहचान कर इनकी सूचना कौशल विकास निगम को शीघ्र प्रदान करनी चाहिए, ताकि उनके प्रशिक्षण की व्यवस्था की जा सके। उन्होंने दिव्यांगजनों को लाभान्वित करने के लिए समाज में जागरूकता उत्पन्न करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि जागरूकता के अभाव में कई बार पात्र व्यक्ति योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाता है, इसलिए प्रचार, शिक्षा व संप्रेषण पर विशेष बल दिया जाना चाहिए।
इससे पूर्व उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए कार्य कर रही विभिन्न संस्थाओं द्वारा विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों द्वारा तैयार किए गए विभिन्न उत्पादों की प्रदर्शनियों का अवलोकन किया और संस्थाओं के प्रयासों की सराहना की।
कार्यक्रम में बतौर विशेष अतिथि चेतना संस्था की संस्थापक मल्लिका नड्डा ने कहा कि अधिनियम के तहत दिव्यांगजनों के अधिकारों को प्रोत्साहित व सरंक्षित किया गया है। अधिनियम में 21 प्रकार की विकलांगता को शिमल किया गया है। रोजगार के लिए आरक्षण तीन प्रतिशत से बढ़ाकर पांच प्रतिशत किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कौशल भारत के तहत दिव्यांगजनों के लिए कौशल परिषद का गठन किया है। मुख्यतः चार प्रकार की विकलांगता पर बल दिया गया है। इन व्यक्तियों को 23 प्रकार के कौशल कार्यक्रमों की व्यवस्था की गई है। उन्होंने राज्य में आधुनिक उत्कृष्टता केन्द्र की स्थापना पर बल दिया और कहा कि पर्वतीय राज्य में कौशल प्रशिक्षण की समुचित व्यवस्था होनी चाहिए। उन्होंने दिव्यांगजनों के लिए विशिष्ट पहचान पत्र जारी करने के लिए आग्रह किया।
हि.प्र. कौशल विकास निगम के प्रबंध निदेशक हंस राज शर्मा ने स्वागत किया तथा प्रदेश में निगम की गतिविधियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि नवधारणा कार्यशाला का उद्देश्य सभी हितधारकों को एक मंच प्रदान कर मंथन और विचार-विमर्श कर चुनौतियों को चिहिनत कर उनसे निपटने तथा दिव्यांगजनों के कल्याण के लिए कार्यनीति तैयार करना है। उन्होंने कहा कि देश में 2.6 करोड़ दिव्यांगजन हैं और 45 प्रतिशत अशिक्षित हैं जिन्हें कौशल विकास के लिए सक्षम बनाना बड़ी चुनौती है। राज्य में 17 से 36 वर्ष आयुवर्ग के 50 हजार दिव्यांगजन हैं और इन्हें सक्षम बनाना आवश्यक है।
संयुक्त निदेशक सोमा रोबिन जॉर्ज ने दिव्यांगजनों के कौशल के लिए विभाग के प्रयासों की जानकारी देते हुए कहा कि असीम तथा सुजोप योजनाओं के तहत विशेष रूप से सक्षम व्यक्तियों का सशक्तिकरण कर उन्हें मुख्यधारा से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि 3800 दिव्यांगजनों को स्वयं सहायता समूहों से जोड़ा गया है। इनके लिए प्रशिक्षण मॉडयूल तैयार किया गया है जिसमें इन व्यक्तियों के मनोबल को बढ़ाने पर विशेष बल दिया जा रहा है। इन्हें अतिथ्य सत्कार व कम्प्यूटर में प्रशिक्षण प्रदान कर निजी क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध करवाए गए हैं।
एशियन विकास बैंक के प्रतिनिधि अखिलेश सम्याल, एनएसडीसी से संजया प्रधान, एससी पीडब्ल्यूडी से डा. निहारिका निगम,  साई स्वयं समिति नई दिल्ली की संस्थापक मीरा भाटिया इन इस अवसर पर दिव्यांगजनों से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखें।
कार्यशाला में स्वयं सेवी संगठनों, होटलों, व्यावसायिक प्रतिष्ठानों के प्रतिनिधियों सहित विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया।

 

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