वी कुमार/मंडी 
प्रदेश भर में जिन घरों का निर्माण टीसीपी के दायरे से बाहर हुआ है। उनमें सरकार छूट देते हुए लोगों को पानी और बिजली की सुविधा प्रदान करे। साथ ही सरकार लोगों को आने वाले समय में घरों को टीसीपी एक्ट के तहत बनवाने के लिए जागरूक भी करे। यह मांग जिला में भवन नियमित संघर्ष समिति की बैठक में उठाई गई। समिति को उम्मीद है, कि प्रदेश में नई सरकार बनी है और नई सरकार इस समस्या की तरफ ध्यान जरूर देगी। भवन नियमित संघर्ष समिति के अनुसार हिमाचल प्रदेश में ऐसे कई घर बन चुके हैं और आने वाले समय में भी भवनों के निर्माण जारी हैं। जो भी भवन टीसीपी एक्ट के दायरे के बाहर हैं और सरकार को उन्हे एकमुश्त सुविधा देते हुए नियमित करने की तरफ कार्य करना चाहिए। संघर्ष समिति के हिमाचल प्राधिकरण में आवश्यक संशोधन करने का आग्रह भी प्रदेश की सरकार से किया है।

  भवन नियमित संघर्ष की बैठक को सम्बोधित करते समिति सदस्य उत्तम चंद सैनी

                 समिति ने मांग उठाई है कि प्रदेश प्राधिकरण एक्ट जो कि लगभग 40 वर्ष पुराना है। उसमें जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए बदलाव लाने की जरूरत है ताकि प्रदेश के लाखों लोगों को लाभ मिल सके। समिति सदस्य उत्तम चंद सैनी ने इस मौके पर कहा कि पूर्व की सरकार ने ऐसे भवन मालिकों के लिए रिटेंशन पॉलिसी लाई थी। जिसे कोर्ट ने रद्द कर दिया था। अब प्रदेश के लाखों भवन फिर से अनिधिकृत हो गए हैं, जिससे उन लोगों को पेरशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जिन्होने अपनी खून पसीने की कमाई से लाखों रूपए खर्च कर घर तो बनाए लेकिन बिजली पानी के बगैर वह किसी और जगह रहने को मजबूर हो गए हैं।
          भवन नियमित संघर्ष समिति ने प्रदेश सरकार से आग्रह किया है, कि जब तक ऐसे भवनों को लेकर टीसीपी के तहत कोई फैसला नहीं आता तब तक इन भवनों में बिजली पानी के कनैक्शन लगाने की अनुमति प्रदान की जाए और लोगों को थोड़ी राहत प्रदान की जाए।
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