बिलासपुर ( अभिषेक मिश्रा ) :  एसीसी भारतीय मजदूर संघ के 19 सितम्बर को होने वाले चुनाव को लेकर मजदूर संघ के कर्मचारियों ने कम्पनी प्रबन्धन और वर्तमान मजदूर संघ के पदाधिकारियों की मजदूर अहित में किया गया फैसला बताया है। यह बात एसीसी मजदूर संघ के कर्मचारियों ने एस.डी. एम जिला को ज्ञापन सौंपते हुए कही  है ।
       उन्होंने बताया कि वर्तमान काला राम कार्यकारिणी एवं  कम्पनी प्रबन्धन ने बिना पारदर्शिता के चुनाव करवाने के लिए यह तिथि तय कर ली है। जबकि यूनियन विधानानुसार साधारण सभा तय कर चुनाव होते है , जिसके लिए पूरा दिन लग जाता है परन्तु कम्पनी प्रबन्धन ने पूर्व की तरह ही सत्ताधारी कायकरिणी को चयनित करने के लिए कई तरह के हथकंडे अपना रही है।
       मजदूर संघ के मजदूर शिवराम सांख्यान, हंसराज, नेकराम, देवीराम, सतीश कुमार, सोहन सिंह, ज्ञान चन्द, निक्कू राम, मनदीप कुमार, इंद्र देव, सुनील चौधरी, राजकुमार, राजेन्द्र कुमार, जगतपाल, रामलाल, राजूराम, राजेन्द्र कुमार दर्जनों मजदूरों ने हस्ताक्षर अभियान चलाकर उनके साथ कम्पनी प्रवंधन और मजदूर संघ की वर्तमान पदाधिकारियों द्वारा आज तक किए गए शोषण एवं  19 सितम्बर को करवाए जा रहे चुनाव पद्दति को लेकर सौपे गए ज्ञापन में कहा कि जो कार्यकारिणी सदस्य मजदूर हित मे आवाज उठा रहे है उन्हें गेट मीटिंग को लेकर भी बाधाएं डाली जा रही है।
       जबकि वर्तमान काला राम कार्यकारिणी को कम्पनी द्वारा कोर्ट के स्टेऑर्डर के बावजूद भी एसीसी गेट के अंदर भी गेट मीटिंग करने की खुली छुट दी गई है वही पर चुनाव प्रचार के लिए भी उन्हें 24 घण्टे खुला छोड़ा गया है। परंतु जो कर्मचारी इस त्रुटिपूर्ण चुनाव पद्दति के खिलाफ है उन्हें 24 घण्टे बंधुआ मजदूरों की तरह बांध रखा है। ताकि निकट चुनाव में अन्य मजदूरों को मानसिक रूप से परेशान कर उन्हें मत डालने पर मजबूर कर सके।
         पूर्व कार्यकरिणी पदाधिकारी शिव राम सांख्यान का कहना है कि 19 सितम्बर  को करवाये जा रहे चुनाव कम्पनी प्रबन्धन का वर्तमान मजदूर संघ कार्यकारिणी के साथ रचा गया षड्यंत्र है । जिसमे विरोधी मजदूरों की कारखाने में ड्यूटी लगाई जाएगी ताकि वह चुनाव प्रक्रिया में भाग ना ले सके और जो उनके चहेते है वही मतदान कर सके।
       उन्होंने एस डी एम बिलासपुर से आग्रह किया है कि चुनाव की पारदर्शिता को मध्यनजर रखते हुए 19 सितम्बर को ठेका मजदूरों को छुटि दिलवाई जाए ताकि मतदान प्रत्यक्ष रूप से सभी मजदूरों की सहमति से हो सके।
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