नेरचौक (कपिल सेन): नन्हीं परी को यह तक नहीं पता कि उसके पिता अब कभी नहीं लौटेंगे। दुनिया से अनजान तीन साल की एलिना इतनी छोटी सी उम्र में उन तमाम रस्मों को निभा रही है, जो पिता के निधन पर बेटा निभाता है। देश की रक्षा में अपने प्राण न्यौछावर कर पिता सुरेंद्र कुमार ने तो शहादत का चोला पहन ही लिया था, लेकिन नन्हीं बेटी भी उन रस्मों को निभा रही है, जिसे देखकर हर कोई हैरान है। वीरवार शाम, जब मासूम एलिना से अस्थि विसर्जन की रिवायत निभवाई जा रही थी तो गंगा तट पर मौजूद हर शख्स इस मंजर को देखकर हैरान भी था, साथ ही भावुक भी नजर आया। सोमवार को छत्तीसगढ़ के नक्सली हमले में शहीद सुरेंद्र कुमार की एलिना इकलौती बेटी है। शहादत से 10 दिन पहले सुरेंद्र जब घर आया था तो अपनी लाडो बेटी को लेकर वाघा बॉर्डर समेत गुरुद्वारा श्री हरमंदिर साहिब भी गया था। कुछ सालों बाद जब एलिना दुनियादारी को समझने लगेगी, तब शायद उसे पिता की शहादत का अहसास होगा। संभवत: असल मायनों में एलिना की आंखें नम तो होंगी, लेकिन कहीं न कहीं पिता की शहादत पर फक्र भी महसूस करेगी। पिता की शहादत के बाद कस्बे में एलिना अब सामान्य बच्ची नहीं रही है। एक तो पिता ने शहादत पाई है, वहीं दूसरी तरफ महज तीन साल की उम्र में ऐसी रस्मों को निभाया है, जो सामान्य नहीं हैं। अस्थि विसर्जन के दौरान शहीद की विधवा पत्नी किरण के साथ बड़े भाई के अलावा परिवार के अन्य सदस्य भी गए।

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